श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने भारत-पाकिस्तान संबंधों और शांति वार्ता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव का स्थायी समाधान केवल बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है, हिंसा से नहीं।

उमर अब्दुल्ला ने पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के प्रसिद्ध कथन का उल्लेख करते हुए कहा, “दोस्त बदले जा सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं।” उन्होंने कहा कि यह सोच आज भी उतनी ही प्रासंगिक है और भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में शांति की दिशा में प्रयास जारी रहने चाहिए।

बीजेपी के रुख पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने शांति प्रयासों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रुख पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब जम्मू-कश्मीर के नेता भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद की बात करते हैं, तो उनकी आलोचना की जाती है। वहीं, यदि इसी तरह की अपील Rashtriya Swayamsevak Sangh के वरिष्ठ नेताओं की ओर से आती है, तो उस पर वैसी प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिलती।

उन्होंने कहा, “अगर RSS पाकिस्तान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की बात करता है तो उसे स्वीकार किया जाता है, लेकिन जब कश्मीरी नेतृत्व यही मांग करता है, तो विवाद खड़ा हो जाता है।”

‘हिंसा नहीं, संवाद ही है रास्ता’

भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों को प्रमुख नागरिकों द्वारा लिखे गए पत्र के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पिछले कई दशकों का अनुभव बताता है कि हिंसा किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं दे सकी है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत ही आगे बढ़ने का सबसे प्रभावी तरीका है।

बातचीत के लिए जरूरी है अनुकूल माहौल

उमर अब्दुल्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्थक और रचनात्मक वार्ता के लिए अनुकूल वातावरण होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और उग्रवादी गतिविधियों को रोकने के लिए ठोस और विश्वसनीय कदम उठाने होंगे। तभी दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल हो सकेगा।

जम्मू-कश्मीर पर पड़ता है सीधा असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ने वाला तनाव सबसे अधिक जम्मू-कश्मीर के लोगों को प्रभावित करता है। सीमा पार गोलीबारी और शत्रुता के कारण अतीत में कई नागरिकों की जान गई है, सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं और क्षेत्र के आर्थिक विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुरक्षा, शांति और विकास को ध्यान में रखते हुए ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए जो क्षेत्र में स्थिरता और सामान्य स्थिति को मजबूत करें।

हालांकि, भारत सरकार की ओर से लंबे समय से यह स्पष्ट रुख रखा गया है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की सार्थक बातचीत के लिए सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ पर प्रभावी रोक आवश्यक है।

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